-राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी जिम्मेदारी देने के फिराक में है तृणमूल काग्रेस
-उत्तर बंगाल के भाजपा के सभी सासदों समेत पूर्वोत्तर के सीटों पर है नजर
अशोक झा, सिलीगुड़ी:
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मिशन 2024 के लिए तुरूप के इक्के के रूप में मुकुल राय को इस्तेमाल करना चाहती है। इसका प्रमुख कारण मुकुल राय का भारतीय जनता पार्टी में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के पद पर काम करना बताया जाता है। लोकसभा चुनाव भले ही अभी दूर हो लेकिन इसके लिए राजनीति शह मात का खेल शुरू कर दिया गया है। तृणमूल काग्रेस के लिए पिछले 7 वर्षो में भाजपा के प्रति लोगों में बढ़ता गुस्सा और कमजोर विपक्ष को एकजुट कर भाजपा के खिलाफ खरा करने की चुनौती है। वहीं दूसरी ओर मुकुल राय को 2024 से पहले तृणमूल काग्रेस में इस बात को सिद्ध करना है कि वह वास्तव में राजनीति के चाणक्य हैं। उन्हें मौका मिला तो इस बात को प्रमाणित कर सकते हैं। बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्हें पार्टी ने मौका नहीं दिया जिसके कारण भाजपा को 77 सीट पर ही संतोष करना पड़ा।
2017 में तृणमूल से भाजपा में जाने के बाद इस बार अपना पहला चुनाव जीतने वाले रॉय जब अनौपचारिक रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बाद पार्टी में नंबर 2 के व्यक्ति थे, तो 2018 के पंचायत चुनावों और 2019 लोक सभा में भाजपा की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मुकुल राय को तृणमूल काग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर 2024 और उससे पहले होने वाले राज्यों के चुनाव के लिए मैदान में उतरने वाली है।तृणमूल काग्रेस राष्ट्रीय राजनीति में मौका देगी तो वह भारतीय जनता पार्टी को बताएंगे की उम्र में कितनी क्षमता है। इसी के तहत उन्होंने अपना खेल शुरू भी कर दिया है। बंगाल की राजनीति में पार्टी के अंदर के नेताओं को तोड़ने में माहिर माने जाने मुकुल राय के तृणमूल काग्रेस में शामिल होते हैं भारतीय जनता पार्टी में टेंशन शुरू हो गया है। इसका बड़ा कारण उनके द्वारा की गई घोषणा बड़ी मात्रा में भाजपा छोड़ टीएमसी में शामिल होंगे सासद और विधायक। इस घोषणा के साथ ही तृणमूल काग्रेस में उनके इस बयान का मुख्यमंत्री ममता बनर्जी निधि स्वागत किया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि जो मुकुल के साथ पार्टी छोड़कर गए थे उनकी वापसी में कोई बाधा नहीं होगी। यही बात उत्तर बंगाल भाजपा के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। तृणमूल काग्रेस और मुकुल राय के करीबी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मुकुल राय ने पार्टी में योगदान के साथ ही उत्तर बंगाल के दो सासद और 10 विधायकों से संपर्क किया है। इसमें कूचबिहार, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जिले के ज्यादातर नेता है शामिल है। यह वह नेता है जो मुकुल लड़ाई के उंगली पकड़कर ही एम से छोड़ भाजपा में शामिल हुए थे। उनके दिशा निर्देश पर ही भारतीय जनता पार्टी में बुलंदियों को छुआ है। बताया जाता है कि मुकुल राय की पकड़ उत्तर बंगाल में इस क्षेत्र में काफी ज्यादा है। बीजेपी के बड़े नेता मुकुल रॉय ने अपने बेटे सुभ्राशु के साथ तृणमूल काग्रेस में वापसी की है। यही नहीं, जब से पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आए हैं, टीएमसी से बीजेपी में गए नेताओं के घर वापसी की बेचैनी की खबरें लगातार चर्चा में है। इसमें सिर्फ विधायक और सासद ही नहीं पंचायत और नगर पालिका क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि भी शामिल है। मजे की बात है कि भाजपा नेताओं और जनप्रतिनिधियों से डील करने के लिए तृणमूल काग्रेस का कोई नेता नहीं बल्कि मुकुल राय के संपर्क में भाजपा के नेता ही ऐसे जनप्रतिनिधियों से लगातार संपर्क में है।
प्रतिनिधियों को समझाने की हो रही है कोशिश
भाजपा विधायकों और सासदों को बताया जा रहा है कि चुनावी नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि बंगाल में ममता बनर्जी को चुनौती देने की सियासी ताकत किसी भी नेता में नहीं है। यहा तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में भी नहीं। यही वजह है कि टीएमसी में वापसी के लिए भाजपा के नेता इतने बेचैन नजर आ रहे हैं। विधायक और सासदों को समझाया जा रहा है कि अपने क्षेत्र का विकास चाहिए तो उन्हें राज्य सरकार के साथ आना होगा। विकास और सुरक्षा दोनों ही जनप्रतिनिधियों के लिए महत्वपूर्ण है। वह तभी हो सकता है जब राज्य की सत्ता उनके साथ हो। नेताओं को यह भी समझाया जा रहा है वापसी के साथी उनके खिलाफ दर्जी मामले भी खत्म किए जाएंगे। मकुल राय के करीबी सूत्रों का मानना है कि मुकुल राय बंगाल की राजनीति में सीधे हस्तक्षेप नहीं करेंगे। जो भी काम करेंगे उसका सारा श्रेय अभिषेक बनर्जी को ही देंगे। उनके द्वारा तैयार रूट मैप पर अंतिम मुहर अभिषेक बनर्जी और ममता बनर्जी लगाएगी और भारतीय जनता पार्टी को 2024 लोकसभा चुनाव से पहले पूरी तरह कमजोर करेंगे। मुकुल राय और टीएमसी इतने पर ही चुप नहीं बैठने वाली। भाजपा नेता सुवेंदू अधिकारी की पकड़ वाली मालदा उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण दिनाजपुर में भी तृणमूल काग्रेस अपनी मजबूती प्रदान करने वाली है। तृणमूल काग्रेस में अभी भी कुछ ऐसे नेता हैं जो लगातार अधिकारी परिवार के संपर्क में हैं वैसे नेताओं का तृणमूल काग्रेस में 2024 से पहले पर खतरा जाएगा।
राष्ट्रीय राजनीति में रहेंगे सक्रिय
त्रिपुरा असम समेत पूर्वोत्तर में अपनी पकड़ रखने वाले मुकुल राय को तृणमूल काग्रेस बड़ी जिम्मेदारी दे सकती है।पश्चिम बंगाल में भाजपा की ओर से दी गई दमदार चुनौती के बावजूद ममता बनर्जी को मिली भारी जीत से पार्टी में उत्साह का माहौल बना है। भाजपा की ओर से पूरी ताकत झोंके जाने के बावजूद दीदी एक बार फिर सत्ता में वापसी में कामयाब रहा।चुनाव जीतने के बाद ममता ने राज्य में पार्टी का काम देख रहे अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव बनाकर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। हालाकि सियासी जानकारों का यह भी मानना है कि इस कदम के जरिए ममता ने यह संकेत भी दे दिया है कि उनके बाद अभिषेक ही उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी होंगे।
दूसरे राज्यों में ताकत दिखाएगी तृणमूल कांग्रेस
राष्ट्रीय महासचिव बनाए जाने के बाद अभिषेक ने दूसरे राज्यों में भी पार्टी को मजबूत बनाने की रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि हम तृणमूल काग्रेस को राष्ट्रीय पार्टी बनाएंगे और पार्टी दूसरे राज्यों में भी अपनी दमदार उपस्थिति दिखाएगी। अभिषेक ने कहा कि हमारा लक्ष्य सिर्फ भाजपा को हराना ही नहीं है बल्कि हम देश को बचाने के साथ ही देश के संविधान की भी रक्षा करना चाहते हैं। तृणमूल काग्रेस की ओर से पार्टी को बड़ा रूप देने की कितनी गंभीर कोशिश की जा रही है, इसे इसी बात से समझा जा सकता है कि अभिषेक ने एक महीने के भीतर पार्टी की विस्तार योजना का पूरा खाका पेश करने की बात कही है। उन्होंने कहा कि पार्टी अब सिर्फ अब पश्चिम बंगाल की तक ही सीमित नहीं रहेगी बल्कि हम अन्य राज्यों में भी अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराएंगे। उत्तर प्रदेश सहित पाच राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। माना जा रहा है कि टीएमसी की ओर से इन चुनावों में उम्मीदवार उतारे जा सकते हैं। जिन राज्यों में चुनाव होने हैं उनमें उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर शामिल हैं। यहा भी किसान आदोलन समेत अन्य स्थानीय मुद्दों को लेकर मुकुल राय के नेतृत्व में रणनीति तैयार की जाएगी जिससे भाजपा को पराजित किया जा सके।






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