महिंद्रा का XP Plus ट्रैक्टर कैसे आलू किसानों की पहली पसंद है?

महिंद्रा ट्रैक्टर्स को आलू के प्लांटर को उठाने में किसी तरह की परेशानी नहीं आती है।
Publish Date:Mon, 28 Dec 2020 11:54 AM (UTC)Author: Author: Ankit Kumar

नई दिल्ली, ब्रांड डेस्क। उत्तर प्रदेश के आलू किसानों में महिंद्रा XP Plus सीरीज के ट्रैक्टर्स पसंदीदा और भरोसेमंद ब्रांड है। इस सीरीज के ट्रैक्टर्स शानदार माइलेज देने के साथ ही पावर में काफी दमदार होते हैं। इनमें नया एक्स्ट्रा लॉन्ग स्ट्रोक इंजन है। जिसमें 2 हार्सपावर का ज्यादा इंजन पावर है। वहीं इसमें कम ईंधन खर्च होता है। इस सीरीज के ट्रैक्टर्स पर 6 साल की वॉरंटी मिलती है, जो इंडस्ट्री में पहली बार है। यह पहले से ज्यादा मैक्स और बैक अप टॉर्क देता है। इसमें आधुनिक एडीडीसी हाइड्रोलिक है। यह खेती के भारी से भारी उपकरणों को आसानी से चलाने में सक्षम है। यह खेती के हर काम अधिक सटीकता से करता है।  

 

यूपी के 'आलू के उस्ताद' क्यों इसे अपना पसंदीदा और भरोसेमंद ब्रांड मानते हैं: 

  1. यहां के आलू की खेती करने वाले किसानों का मानना है कि इसमें अत्याधुनिक एमलिफ्ट हाइड्रोलिक है। यह आलू खेती के लिए सर्वश्रेष्ठ है। क्योंकि आलू की खेती के लिए हैवी हाइड्रोलिक होना बेहद जरूरी माना जाता है। दरअसल, महिंद्रा का प्रिसिशन हाइड्रोलिक सही और समान गहराई पर आलू की बुआई करता है। इस वजह से आलू का अधिक उत्पादन मिलता है।

     

  2. वहीं कुछ आलू किसानों का मानना है कि इसका माइलेज शानदार है। वहीं इसका पावर दमदार है। यही वजह है कि अन्य ट्रैक्टरों की तुलना में यह आलू की सही स्पीड में बुआई करता है। इसलिए महिंद्रा आलू किसानों के बीच महिंद्रा उनका पसंदीदा ब्रांड बना हुआ है। 

     

  3. महिंद्रा ट्रैक्टर्स को आलू के प्लांटर को उठाने में किसी तरह की परेशानी नहीं आती है। क्योंकि इसकी लिफ्ट कैपेसिटी 1500 किलोग्राम की है। वहीं इससे आलू की बुआई करने पर आलू की खुदाई में भी कोई नुकसान नहीं होता है। इससे किसानों को अधिक पैदावार मिलती है। 

     

  4. आलू की बुआई के दौरान खेत में टर्न लेते समय इसका हाइड्रोलिक जल्दी से प्लांटर को उठाता है और जल्दी रख देता है। जिससे कम समय लगता है और ईंधन की बचत होती है। अन्य ट्रैक्टर के मुकाबले इसका डीजल खर्चा कम है। इसमें एक घंटे में 4 से साढ़ें चार लीटर डीजल की खपत होती है। वहीं अन्य ट्रैक्टर आलू की जुताई के लिए एक घंटे में 5 से साढ़े पांच लीटर डीजल खर्च हो जाता है।

     

  5. इसका कांस्टेंट मेश गियर बाॅक्स लगाते समय बहुत आवाज नहीं करते हैं बल्कि आसानी से लग जाते हैं। इस वजह से चलाने में ज्यादा आराम मिलता है।

     

  6. साथ ही इसमें आरामदायक पावर स्टीयरिंग है, जिस वजह से ट्रैक्टर को मोड़ने में कोई तकलीफ नहीं आती है। ड्राइवर इससे लंबे समय तक काम कर सकता है। कम जगह में भी ट्रैक्टर को आसानी से घुमाया जा सकता। 

     

  7. ट्रैक्टर के अन्य ब्रांड को आलू प्लांटर को उठाने में काफी परेशानी होती थी, लेकिन महिंद्रा m-Lift में पावरफुल हाइड्रोलिक होती है जिससे प्लांटर को आसानी से उठाया जा सकता है।  

     

महिंद्रा की वो बातें जिसके ''आलू उस्ताद'' कायल है:

  1. आलू के उस्तादों का कहना है कि इसका पावर ब्रेक्स इसे सबसे अलग बनाता है जो अन्य कंपनियों के ट्रैक्टर में नहीं मिलते हैं।  

     

  2. दूसरी कंपनियों के ट्रैक्टर की तुलना में इसकी सीट काफी आरामदायक होती है। इस वजह से ट्रैक्टर ड्राइवर थकता नहीं और वह अधिक समय तक ट्रैक्टर को चला सकता है। जिससे अधिक काम होता है।

     

  3. वहीं किसानों का मानना है कि महिंद्रा का गियर बदलना काफी आसान है, इसलिए चलाना बेहद आरामदायक हो जाता है।

     

  4. इसका डबल क्लच बेहद टिकाऊ होता है। इसकी देखभाल काफी किफायती होती है। वहीं सर्विसिंग में भी ज्यादा खर्च नहीं होता है। साथ ही इसके पार्ट्स देश के किसी भी कोने सुलभता से मिल जाते हैं। यही वजह है कि किसान महिंद्रा को अपना भरोसेमंद ब्रांड मानते हैं।

     

  5. वहीं कई किसानों को महिंद्रा का शानदार स्टाइल, नया लुक और हैडलैम्प्स बेहद पसंद है।

     

  6. कुछ किसानों का कहना है कि इसका माइलेज शानदार है। यह एक घंटे में एक लीटर डीजल की बचत करता है। इसका ब्रेक भी आसानी से लग जाता है। महिंद्रा से रोटावेटर चलाने में बेहतर कवरेज मिलता है वहीं यह काम को भी जल्द पूरा करता है। थ्रेसर को उच्चतम पीटीओ पावर के साथ चलता है। सर्विसिंग के लिए किसानों को सिर्फ एक करने की जरुरत होती है।  

     

आइए जानते हैं आलू के उस्ताद क्या मानते हैं कि आलू प्लांटर कैसा होना चाहिए: 

  1. आलू प्लांटर ऐसा होना चाहिए जो आलू के बीज को खराब नहीं होने दें। साथ ही एक जगह पर एक ही बीज डालें ताकि पौधों का दोहराव न हो।

     

  2. प्लांटर ऐसा होना चाहिए जो यह आलू के बीज को एक समान दूरी और एक समान गहराई पर बुआई करता हो। ताकि आलू का अधिक उत्पादन प्राप्त हो।

     

  3. आलू बुआई के लिए प्लान्टर का डिजाइन ऐसा होना चाहिए, जो आलू के बीज के मुताबिक सही बुआई करें। इसका मतलब यह है कि यदि आलू का बीज सही सीधी रेखा में और यदि आलू का बीज कटा हो तो जिगजैग पद्धति में बुआई करें।

(यह आर्टिकल ब्रांड डेस्‍क द्वारा लिखा गया है।)

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